हो सिकंदर सिकंदर ओ सिकंदर

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गाना: हो सिकंदर सिकंदर ओ सिकंदर
फिल्म: कॉर्पोरेट
गायक: कैलाश खेर, सपना मुख़र्जी
गीत: संदीप नाथ
संगीत: शमीर टंडन


(क्यों तरसता हैं तू बन्दे, जल्दी ही बदलेगा मंजर - २ 
झांक ले तू एक दफा बस, दिल से अपने दिल के अन्दर) - २
तुझमे भी वोह बात हैं, तेरी भी औकात हैं - २
तू भी बन सकता हैं सिकंदर - २
हो सिकंदर सिकंदर ओ सिकंदर ................
झांक ले, झांक ले, झांक ले दिल के अन्दर 
हो सिकंदर सिकंदर ओ सिकंदर, (झांक ले - ३) दिल के अन्दर 
हो सिकंदर सिकंदर ओ सिकंदर ................

(आँख भला तेरी ग़म से क्यों नम होती हैं  - २ 
पल में हवाए पूरब से पश्छिम होती हैं) - २
सावन में फिर रूट बदलेगी - २
होगी हरी धरती बंजर - २
हो सिकंदर सिकंदर ओ सिकंदर, (झांक ले -३) दिल के अन्दर 

(कोशिश करने से मुश्किल आसन होती हैं - २ 
मिलने से क्या बोल तमन्ना कम होती हैं) - २
हो जो भी मिला वोह भी हैं मुकद्दर 
जो ना मिला वोह भी हैं मुकद्दर - २
ओ सिकंदर, ओ सिकंदर, ओ सिकंदर (झांक ले - ३) दिल के अन्दर 
झांक ले -३ दिल के अन्दर 
क्यों तरसता हैं तू बन्दे, जल्दी ही बदलेगा मंजर 
झांक ले तू एक दफा बस, दिल से अपने दिल के अन्दर 
तुझमे भी वोह बात हैं, तेरी भी औकात हैं - २
तू भी बन सकता हैं सिकंदर - २
हो सिकंदर सिकंदर ओ सिकंदर, (झांक ले - ३) दिल के अन्दर 
झांक ले -३ दिल के अन्दर 
ओ सिकंदर, ओ सिकंदर, ओ सिकंदर