हनीमून की रात

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गाना: हनीमून की रात
फिल्म: द डर्टी पिक्चर
गायक: सुनिधि चौहान
गीत: रजत अरोरा
संगीत: विशाल-शेखर


हनीमून की रात होती है मैं वही रात हूँ.. 
उस रात में जो बात होती है मैं वही बात हूँ..
होश उढ़ा दे जो दिलबर का मैं वही शराब हूँ 
कामदेव का सूत्र पढ़ा है 
मैं वही किताब हूँ - २ 
 
बंजो सी बजती हूँ ख़्वाबों में सजती हूँ 
करले मेरे जेंटलमेन खराबी जरा 
व्हिस्की सी चढ़ती हूँ हिचकी सी फसती हूँ 
बनजा मेरे जेंटलमेन शराबी जरा 
भूल जाए हम जो खुद को ऐसी में तू पिला दे जरा 

कमरे में अँधेरा कर आँखों को खोल दे 
जो भी है तेरे दिल मैं चुपके से महफ़िल में 
कानो में बोल दे 
खतरे का डर ना कर हर हद को तोड़ दे 
जरा सा आगे बढ़ तू ना मुझसे ऐसे लढ़ तू 
सब मुझपे छोड़ दे 
अरे बुरा आ भुला है 
रूठा है चुभता है दुखता है सपना वोह जिस में मैं ना हूँ 
मैं ही मैं हूँ महकी मैं हूँ 
मुझ में मैं तू मिला दे जरा 

हर जलवा मेरा कातिल मैं होंठों से डसती हूँ 
चुरी सी चुब्ती हूँ गोली सी लगती हूँ ज़हर सी चड्ती हूँ 
हर तन पे सजता है जो मैं ऐसा सोना हूँ 
जलाके जो ना जले बुझाके जो ना बुझे मैं ऐसा शोला हूँ 
हे जला ........
कला है मैला है गन्दा है बला है 
जीना वोह जिस में मैं ना हूँ 
मैं ही मैं हूँ महकी मैं हूँ 
मुझ में मैं तू मिला दे जरा 
हनीमून की रात होती है मैं वही रात हूँ 
उस रात मैं जो बात होती है मैं वही बात हूँ 
होश उढ़ा दे जो दिलबर का मैं वही शराब हूँ 
कामदेव का सूत्र पढ़ा है 
मैं वही किताब हूँ - २ 

बंजो सी बजती हूँ ख़्वाबों मैं सजती हूँ 
करले मेरे जेंटलमेन खराबी जरा 
व्हिस्की सी चढ़ती हूँ हिचकी सी फसती हूँ 
बनजा मेरे जेंटलमेन शराबी जरा 
भूल जाए हम जो खुद को ऐसी में तू पिला दे जरा