दो दिन के लिए मेहमान यहाँ

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गाना: दो दिन के लिए मेहमान यहाँ
फिल्म: बादल - १९५१
गायक: लता मंगेशकर
गीत: शैलेन्द्र
संगीत: शंकर-जयकिशन


दो दिन के लिए मेहमान यहाँ, मालूम नहीं मंजिल है कहा
अरमान भरा दिल तोह है मगर, जो दिल से मिले वोह दिल है कहा

एक फूल जला एक फूल खिला, कुछ अपना लुटा कुछ उनको मिला
कैसे करे किस्मत से गिला, हम कैसे करे किस्मत से गिला
रंगीन हर एक महफ़िल है कहा
दो दिन के लिए.........
 
दुनिया में सवेरा होने लगा, इस दिल में अँधेरा होने लगा
हर जख्म सिसक के रोने लगा, किस मुंह से कहे कातिल है कहा
दो दिन के लिए........

जलाता है जिगर उठता है धुवा, आँखों से मेरी आंसू है रवा
मरने से हो जाये दफा, जो मरने से हो जाये दफा
ऐसी यह मेरी मुश्किल है कहा
दो दिन के लिए.........