ख़ुशी तोह कैद में है

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गाना: ख़ुशी तोह कैद में है
फिल्म: बादल - १९५१
गायक: लता मंगेशकर
गीत: हसरत जयपुरी
संगीत: शंकर-जयकिशन


ख़ुशी तोह कैद में है, यह कोई जीना भी जीना है
अरे जालिम ज़माने तुने दिल का चैन छिना है

रोता है मेरा दिल, किसको पुकारू क्या करू
जीना भी है मुश्किल, (किसको पुकारू क्या करू - २)
क्या करू क्या करू, रोता है मेरा दिल
किसको पुकारू क्या करू..........

(तक़दीर ने मुझको लुट लिया, (हर आस का सूरज डूब गया -२)) - (२)
यह गम की घटाए ऐसी उठीं, (उम्मीद पे पानी फेर दिया -२)
अब दूर हुयी मंजिल, किसको पुकारू क्या करू..........

यह फूल ख़ुशी के कांटे हैं, हम (चुपके चुपके रोते हैं - २)
आइ मौत गवाही देना तू, (हम प्यार पे कुर्बान होते हैं -२)
दुनिया है बड़ी कातिल, (किसको पुकारू क्या करू - २)
क्या करू क्या करू, रोता है मेरा दिल
किसको पुकारू क्या करू..........

मर जाये तोह इतना कर देना, (दो आंसू आके चढ़ा देना -२)
इस प्यार की उजड़ी बस्ती में, (इक याद का दीप जला देना -२)
तुम हो ना सके हासिल, (किसको पुकारू क्या करू - २)
क्या करू क्या करू, रोता है मेरा दिल
किसको पुकारू क्या करू, रोता है मेरा दिल