आँखो की

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गाना: आँखो की
फिल्म: हम दिल दे चुके सनम
गायक: कविता कृष्णामूर्ति, कुमार सानु
गीत: समीर
संगीत: इस्माइल दरबार


आँखो की, गुस्ताखियाँ, माफ़ हो - 2
एक टूक तुम्हें देखती हैं, जो बात कहना चाहे ज़बान तुम से ये वो कहती हैं
आँखो की शर्मो हया माफ़ हो
तुम्हे देखके झुकती है, उठी आँखें जो बात न कह सकी झुकी आँखें वो कहती हैं

आँखो की, आँखो की, गुस्ताखियाँ माफ़ हो


काजल का एक तिल तुम्हारे लबों पे लगा लूं
हाँ, चन्दा और सूरज की नज़रों से तुमको बचा लूं
पलकों की चिलमन में आओ मैं तुमको छुपा लूं
खयालों की, ये शोकियाँ, माफ़ हो
हर दम तुम्हे सोचती है जब होश में होता है जहाँ, मदहोश ये करती हैं

आँखो की शर्मो हया माफ़ हो

ये ज़िंदगी आपकी ही अमानत रहेगी, दिल में सदा आपकी ही मुहब्बत रहेगी
इन साँसों को आपकी ही ज़रुरत रहेगी, हाँ, इस दिल की, नादानियाँ माफ़ हो
ये मेरी कहाँ सुनती है, ये पल पल जो होती हैं, बेकल सनम तो सपने नए बुनती हैं 

आँखो की, आँखो की, गुस्ताखियाँ माफ़ हो

शर्मो हया ... माफ़ हो