एक रात में दो दो चाँद खिले

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गाना: एक रात में दो दो चाँद खिले
फिल्म: बरखा
गायक: लता मंगेशकर, मुकेश
गीत: राजेंद्र क्रिशन
संगीत: चित्रगुप्त


एक रात में दो दो चाँद खिले, एक घूँघट में एक बदली में
अपनी अपनी मंजिल से मिले, एक घूँघट में एक बदली में

बदली का वोह चाँद तोह सबका है
घूँघट का वोह चाँद तोह अपना है
मुझे चाँद समझाने वाले बता, य़ेह सच है या सपना है
एक रात में दो दो चाँद खिले ............

मालूम नहीं दो अनजाने, राही कैसे मिल जाते हैं
फूलो को अगर खिलना हो, वीराने में भी खिल जाते हैं
एक रात में दो दो चाँद खिले ............