मिट्टी पे खींची लकीरें

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गाना: मिट्टी पे खींची लकीरें
फिल्म: हम दिल दे चुके सनम
गायक: शंकर महादेवन, कोरस
गीत: समीर
संगीत: इस्माइल दरबार


हे मिट्टी पे खींची लकीरें रब ने तो ये तस्वीर बनी, आग हवा पानी को मिलाया तो फिर ये तस्वीर सजी
ऐ हस्ती तेरी विशाल हो क़ुदरत का तू कमाल, हे मनमोहिनी तेरी अदा
तुझे जब देख ले तो फिर घटा, बरसे झर झर झर झर झर झर
स र र स र र,नाचे चमक चमक वो बिजली दीवानी,है बेमिसाल तू गोरी गोरी अनछुई
तुझमें है क़ुदरत सारी खोई -२
हे आहा हे हे आहा

मिट्टी की है मूरत तेरी मासूमियत फ़ितरत तेरी, ये सादापन, ये भोलापन, तू महकी-महकी, तू लहकी-लहकी
तू चली-चली हर गली-गली, तू हवा के ढंग संग सनन-सनन
तेरा अंग-अंग जैसे जलतरंग, कोई लहर-लहर चली ठहर-ठहर
पानी का मेल तेरे तन बदन, झर-झर र झर र अंगारे जैसा
तेरा रोम-रोम है दहका-दहका, अग्नि का खेल तू अगन-अगन
ज़रा थिरक-थिरक ज़रा लचक-लचक, कभी मटक-मटक कभी ठुमक-ठुमक
चली झूम-झूम कभी घूम-घूम, धरती को चूम मची धूम-धूम
चंचल बड़ी तू नटखट बड़ी, तू बहकी बहार, रस की फ़ुहार
तेरे तीखे नैन तेरे केश रैन, ये बलखाना, ये इतराना
हे आहा हे हे आहा ...