यह कैसा है शहर

हिंदी फ़िल्में > पांच के गाने > यह कैसा है शहर

गाना: यह कैसा है शहर
फिल्म: पांच
गायक: दोमिनिकुए सरेजो
गीत:
संगीत: विशाल भारद्वाज


क्या दिन क्या रात है यहाँ पर, की साला दोनों बराबर - (२ )
ना रस्ते कभी हो खाली, ना बांध होती है गली 
माँ बहिन की याद सबको आती हर पहर 
हल्ला गुल्ला शोर गुल येह कैसा है शहर 
क्या दिन क्या रात है यहाँ पर, की साला दोनों बराबर 
ना रस्ते कभी हो खाली, ना बांध होती है गली 

साँसों मे लाखो करोडो की साँसे खुली 
घुट रहा है दम, घुटन सी हो रही है 
फिर भी सवेरे अकेली हैं आँखे खुली 
कोई आज मिल ही जाएगा, चेहरा जाने पहने कौन सा 
दर से निकल इ ध्हुंधे घर है कहा 
क्या दिन क्या रात है यहाँ पर, की साला दोनों बराबर 
ना रस्ते कभी हो खाली, ना बांध होती है गली 

क्या दिन, क्या रात 
किसके लिए राह चलते येह झूठी हंसी 
छोड़ ना किसी को कुछ नहीं पडी 
कैसे सहे तेलेफोने की खामोशी 
सुने, बिस्तरों पर सो रहे, भूली खुश्बुवे को रो रहे 
निचे, सदके, कहती है आ कूद जा 
क्या दिन क्या रात है यहाँ पर, की साला दोनों बराबर 
ना रस्ते कभी हो खाली, ना बांध होती है गली 
माँ बहिन की याद सबको आती हर पहर 
हल्ला गुल्ला शोर गुल येह कैसा है शहर 
क्या दिन क्या रात है यहाँ पर, की साला दोनों बराबर 
ना रस्ते कभी हो खाली, ना बांध होती है गली