मस्ती में छेड़के तराना कोई दिल का

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गाना: मस्ती में छेड़के तराना कोई दिल का
फिल्म: हकीकत
गायक: मोहम्मद रफ़ी
गीत: कैफ़ी आज़मी
संगीत: मदन मोहन


हो हो ओ हो हो हो हो
ला ल ल ल ल ल ल
ओ हो हो हो हो 

(मस्ती मे छेद्के तरना कोयी दिल का
आज लुतयेग खजना कोयी दिल का) - (२)

प्यर बहल्त नही बह्लने से - (२)
लो मै चमन को चला विरने से
शमा है कब से जुदा पर्वने से
अश्क थमेङे नजर मिल जने से
दिल से मिलेग दिवना कोयी दिल का
आज लुतयेग खजना कोयी दिल का
मस्ती मे छेद्के

मिल्के वोह पह्ले बहुत शर्मयेगी - (२)
आगे बधेगी मगर रुक जयेगी
होके करीब कभी घब्रयेगी
और करीब कभी खिन्च आयेगी
खेल नही है मनना कोयी दिल का
आज लुतयेग खजना कोयी दिल का
मस्ती मे छेद्के

मुख्दे से जुल्फ जरा सर्कौङ
हरी मुख्दे से जुल्फ जरा सर्कौङ
सुल्झेग प्यर उलझ मै जौङ
पके भी हय बहुत पछ्तौङ
ऐस सुकुन कहन फिर पौङ
और नही है थिकना कोयी दिल का
आज लुतयेग खजना कोयी दिल का
मस्ती मे छेद्के
आ ह ह ह ह ह ह
ओ हो हो हो हो हो हो