हनुमान चालीसा

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गाना: हनुमान चालीसा
फिल्म: हनुमान रिटर्न्स
गायक: अरमान मालिक , बेबी अपर्णा , श्रवण सुरेश , स्नेह खानवलकर
गीत:
संगीत: तापस रेलिया


श्री गुरु चरन सरोज रज निज मने मुकुरे सुधारि
वर्नओ रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि
बुधी हिन तनु जनिके सुमिरौ पवन कुमरम्
बल बुधी विद्य देहु मोहे हरहु कलेसविकार्

जै हनुमन ज्ञन गुन सागर्
जै कपिस तिहुन लोक उजागर्
रम दूत अतुलित बल धाम
अन्जनि-पुत्र पवन सुत नाम
महविर विक्रम बज्रङि
कुमती निवार सुमती के सङि
कन्चन वरन विराज सुबेस
कानन कुन्दल कुन्चित केसा
हाथ वज्र और धुवजे विराजे
कन्धे मून्ज जनेहु साजे

शन्कर सुवन केस्री नन्दन्
तेज प्रताप महा जग वन्दन्
विद्यवान गुनी अति चातुर्
राम काज करिबे को आतुर्
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिय
राम लखन सिता मन बसिय
सुक्ष्मा रूप धरी सियही दिखाव
विकत रूप धरी लन्क जलाव
भिमा रूप धरी असुर सङ्हारे
रमचन्द्र के काज सन्वारे

लाये सन्जिवन लखन जियाये
श्री रघुविर हरशी उर लाये
रघुपती किन्ही बहुत बधायि
तुम मम पृये भरत्-ही सम भाइ
सहस बदन तुम्हरो यश गावे
अस कही शृपती कन्थ लगावे
सन्कदिक ब्रह्मदी मुनीस
नारद सारद सहित अहीस
यम कुबेर दिग्पल जहन ते
कवी कोविद कही सके कहन ते

तुम उप्कार सुग्रीवहिन कीन्ह
रम मिलारी रज्पद दीन्ह
तुम्हरो मन्त्र विभीशन मान
लन्केश्वर भरी सुब जग जान
युग सहस्त्रा जो जन पर भानु
लील्यो तही मधुर फल जानु
प्रभु मुदृका मेली मुख माही
जलधी लङ्ही गये अच्रज नाही
दुर्गाम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रहा तुम्ह्रे तेते
 
राम द्वरे तुम रख्वारे
होअत न अज्ञ बिनु पैसरे
सुब सुख लहै तुम्हरी सर्न
तुम रक्षक काहु को दर्न
आपन तेज सम्हारो आपै
तीन्होन लोक हान्क ते कन्पै
भूत पिसाच निकत नहिन आवै
महाविर जब नाम सुनवै
नासे रोग हरै सब पीर
जपत निरन्तर हनुमन्त बीर

सन्कत से हनुमन चुदवै
मन्न करम वचन द्यन जो लवै
सब पर राम तपस्वी राज
तिन्के काज सकल तुम साज
और मनोरथ जो कोइ लवै
सोही इत जीवन फल पवै
चरोन युग पर्तप तुम्हार
है पेर्सिध जगत उजियार
साधु सन्त के तुम रख्वारे
असुर निकन्दन राम दुल्हारे

अश्ता सिधी नव निधी के धात
उस वर दीन जन्की मात
राम रसायन तुम्हरे पास
सदा रहो रघुपती के दास
तुम्हरे भजन राम को पवै
जनम जनम के दुख बिस्रवै
अन्थ काल रघुविर पुर जयी
जहान जनम हरि-बख्त कहयी
और देव्त चित न धरेहि
हनुमन्थ से हि सर्वे सुख करेहि

सन्कत कते मिते सब पीर
जो सुमिरै हनुमत बल्बीर
जै जै जै हनुमन गोसहिन्
कृपा करहु गुरुदेव कि न्यहिन्
जो सत बार पाथ करे कोयि
चुतेही बन्धी महा सुख होयि
जो यह पधे हनुमन चलिस
होये सिद्धी सखी गौरीस
तुल्सिदास सदा हरी चेर
कीजै दस ह्र्दये मेइन देर
 	 	 
पवन्त्नयी सन्कत हरना मङल मुर्ती रूप
रम लखन सिता सहिता ह्र्दये बसहु सुर भूप