रोशनी

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गाना: रोशनी
फिल्म: आरक्षण
गायक: शंकर महादेवन
गीत: प्रसून जोशी
संगीत: शंकर-एहसान-लॉय


बरस रही है रोशनी - २
दीवारे तोड़के राहों को मोडके निकली है रोशनी 
हर बंधन छोड़ के घोलो घोलो यह अँधेरे हाँ
बना दो सिहाही और लिख दो तुम नयी सुबह
तोड़ो ताले सूरज को खोल दो
सबकी मुट्ठी रोशन है बोल दो
तोड़ो कूवे और कर दो तुम नदी
पी लो बांटो है सब की रोशनी 
रोशनी .....
है यह सबकी रोशनी पिघली है यह रोशनी - २ 
बरस रही है रोशनी

सबके लिए रस्ते हो आशा के बसते हो जीन में उजाले बसते हो - २ 
खाई सीधी मिट मिट गयी गयी सीधी हट हट गयी 
हो सबका सूरज सबका आस्मां अब यहाँ 
तोड़ो ताले सूरज को खोल दो सबकी मुट्ठी रोशन है बोल दो 
तोड़ो कूवे और कर दो तुम नदी पी लो बांटो है सब की रोशनी 
रोशनी ....
है यह सबकी रोशनी पिघली है यह रोशनी - २ 

रोशनी की रैली धुप फेल्ली फेल्ली रुटी यह नयी है नवेली - २ 
अब तोह सब है फिसरे रुले एनगिने सबका खिसके रुले 
हो सबकी मंजिल सबका कारवां अब यहाँ 
तोड़ो ताले सूरज को खोल दो सबकी मुट्ठी रोशन है बोल दो 
तोड़ो कूवे और कर दो तुम नदी पी लो बांटो है सब की रोशनी 
रोशनी ....
है यह सबकी रोशनी पिघली है यह रोशनी - २