ओम शांति ओम

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गाना: ओम शांति ओम
फिल्म: ओम शांति ओम
गायक: शान
गीत: जावेद अख्तर
संगीत: विशाल शेखर


सुनने वालो, सुनो ऐसा भी होता है
दिल देता है जो, वोह जान भी खोता है
प्यार ऐसा जो करता है, क्या मर के भी मरता है
आओ तुम भी आज सुनलो
दास्तान है ये के एक था नोजवान जो दिल ही दिल में
एक हसीना का था दीवाना
वोह हसीना थी के जिसकी खूबसुरती
था दुनिया बार में था मशहूर अफसाना
दोनों की यह कहानी है, जिसको सभी
कहते है ओम शांति ओम

(नोजवान की थी आर्जो, उसकी थी यह ही जुस्तुजू 
उस हसीना में उसको मिले इश्क के सारे रंग कबूल) – २
उसने न जाना यह नादानी है
वोह रेत को समजा के पानी है
क्यों ऐसा था, किसलिए था, यह कहानी है
दास्तान है ये के उस दिलकश हसीना के निगाहों दिल में कोई दूसरा ही था
बेखबर इस बात से उस नोजवान के खाबो का अंजाम तो होना बुरा ही था
टूटे खाबों की उस दास्तान को सभी
कहते है ओम शांति ओम

सुनने वालो, सुनो ऐसा भी होता है
कोई जितना हसे उतना ही रोता है
दीवानी होके हसीना, खाए क्या धोके हसीना
आओ तुम भी आज सुनलो
दास्तान है ये के उस मासूम हसीना ने जिसे चाहा वोह था अंदर से हरजाई
संग दिल से दिल लगाके बेवफा के हात आके
उसने एक दिन मौत ही पाई
एक सितम का फसाना ही जिसको सभी
कहते है ओम शांति ओम

क्यों कोई कातिल समजता नही
के जुर्म कोई छुपता नाही
यह दाग वोह है जो मीठता नहीं
रहता है खुनी के हाथ पर
कूँ उस हसीना का जब था हुवा
कोई वहां था पोहुंच तो गया
लेकिन उसे वोह बचा न सका
रोया था प्यार उसकी मौत पर
दास्तान है ये के जो पहचान था है खुनी को
वोह नोजवान है लौट के आया
कह रही है ज़िन्दगी का दिल समज ले
 उसके सर पे छा चूका है मौत का साया
जन्मो की कर्मो की है कहानी जिसे
कहते है ओम शांति ओम - ३