ए खुदा मुझको बता

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गाना: ए खुदा मुझको बता
फिल्म: पाठशाला
गायक: सलीम मर्चंट
गीत: हनीफ़ शैख़
संगीत: हनीफ़ शैख़


(ए खुदा मुझको बता, तू रहता कहाँ, क्या तेरा पता 
हम तो यहाँ पे मुसाफिर है, जो ढुंडे अपनी मंजिल का पता ) -(2)

यारां तेरी यादान आती हैं, जाना मेरी जान जाती है 
तनहाईयो में रहता हूँ, खुद से ही अक्सर यह कहता हूँ 
क्यूँ तुने दिल तोडा, क्यूँ तुने यूं छोड़ा 
क्यूँ तेरा अब्ब भी रहे दिल को इन्तजार 
क्यूँ चली आती है क्यूँ तडपाती है 
क्यूँ हूँ अब्ब भी मैं यूं बेकरार 
ए खुदा मुझको बता, तू रहता कहाँ, क्या तेरा पता 
हम तो यहाँ पे मुसाफिर है, जो ढुंडे अपनी मंजिल का पता 

फासलें है मगर फिर भी तू दूर नही 
माना के हम तो है पर तू मजबूर नही 
हर लमहा मुझको यह तडपाती है 
जाना मेरी जान जाती है 
तनहाईयो में रहता हूँ, खुद से ही अक्सर यह कहता हूँ 
क्यूँ तुने दिल तोडा, क्यूँ तुने यूं छोड़ा 
क्यूँ तेरा अब्ब भी रहे दिल को इन्तजार 
क्यूँ चली आती है क्यूँ तडपाती है 
क्यूँ हूँ अब्ब भी मैं यूं बेकरार 
ए खुदा मुझको बता, तू रहता कहाँ, क्या तेरा पता 
हम तो यहाँ पे मुसाफिर है, जो ढुंडे अपनी मंजिल का पता 

यारां तेरी यादान आती हैं, जाना मेरी जान जाती है 
तनहाईयो में रहता हूँ, खुद से ही अक्सर यह कहता हूँ 
क्यूँ तुने दिल तोडा, क्यूँ तुने यूं छोड़ा 
क्यूँ तेरा अब्ब भी रहे दिल को इन्तजार 
क्यूँ चली आती है क्यूँ तडपाती है 
क्यूँ हूँ अब्ब भी मैं यूं बेकरार 
ए खुदा मुझको बता, तू रहता कहाँ, क्या तेरा पता 
हम तो यहाँ पे मुसाफिर है, जो ढुंडे अपनी मंजिल का पता 
क्यूँ तुने दिल तोडा, क्यूँ तुने यूं छोड़ा 
क्यूँ तेरा अब्ब भी रहे दिल को इन्तजार 
क्यूँ चली आती है क्यूँ तडपाती है 
क्यूँ हूँ अब्ब भी मैं यूं बेकरार