तेरी मर्ज़ी(ए खुदा)

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गाना: तेरी मर्ज़ी(ए खुदा)
फिल्म: पाठशाला
गायक: कैलाश खेर
गीत: हनीफ़ शैख़
संगीत: हनीफ़ शैख़


ओ ओ ए खुदा, तेरी मर्ज़ी के आगे क्या होगा है पता 
तू जो चाहे वैसा समां हो, तेरी रजा 
तू जो चाहे तपती धुप में, ए खुदा 
खिलता हुवा गुलिस्ता होगा 
तुने बनायी राहें, तुने बनायी मंजिल 
हम ले चलें है अपना कारवां, ए खुदा 
तेरी मर्ज़ी के आगे क्या होगा, ए खुदा 

टहनी टहनी से देखो, टुटा है हर पत्ता 
बिखरा हुवा पड़ा है आज यह गुलिस्ता 
झिलमिलाता यहाँ मुस्कुराता यहाँ 
था ख़ुशी से कभी यह आशियाँ 

रहबर हो तुम हमारे, फिर कैसा दिया फरमान 
फ़रिश्ते भी रुसवा होंगे देखके ए अंजाम 
यह ना चाहे कोई अब्ब बता दे तू ही 
कहकर अपना तू क्यूँ बनता अनजान 
ए खुदा, तेरी मर्ज़ी के आगे क्या होगा है पता 
तू जो चाहे वैसा समां हो, तेरी ही रजा 
तू जो चाहे तपती धुप में, ए खुदा 
खिलता हुवा गुलिस्ता होगा 
तुने बनायी राहें, तुने बनायी मंजिल 
हम ले चलें है अपना कारवां