जग सूना सूना लागे

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गाना: जग सूना सूना लागे
फिल्म: ओम शांति ओम
गायक: राहत फ़तेह अली खान, ऋचा शर्मा
गीत: विशाल दादलानी, जावेद अख्तर, कुमार
संगीत: विशाल दादलानी, शेखर रवजिअनी


मैं ताज या नामरो, हाय वे दासु मैं की करा
दिल जुड़े बिना ही टूट गए, हाथ मिले बिना ही छुट गए
खेल खेले किस्मत ने
बार बार रोड अंखिया तैनू जो न वेक सखिया, कुदरत ने

छान से जो टूटे कोई सपना, (जग सूना सूना लागे - २ )
कोई रहे न जब अपना, जग सूना सूना लागे
जग सूना सूना है तोह यह क्यूँ होता है
जब यह दिल रोता है, रोये सिसक सिसक के हवाएं, जग सूना लागे
छान से जो टूटे कोई सपना, (जग सूना सूना लागे - २ )
कोई रहे न जब अपना, (जग सूना सूना लागे - २ ) रे 

सूना लागे रे रूठी रूठी सारी रातें, फीके फीके सारे दिन वीरानी सी वीरानी है
तन्हाई सी तन्हाई है और इक हम है प्यार के बिन हर पल
छान से जो टूटे कोई सपना, (जग सूना सूना लागे - २ )
कोई रहे न जब अपना, (जग सूना सूना लागे - २ ) रे 

पथरो की इस नगरी में, पत्थर चेहरे, पत्थर दिल फिरता है
मारा मारा क्यूँ राहों में तू आवारा यहाँ न होगा कुछ हासिल, मेरे दिल
छान से जो टूटे कोई सपना, (जग सूना सूना लागे - २ )
कोई रहे न जब अपना, जग सूना सूना लागे

जग सूना सूना है तोह यह क्यूँ होता है
जब यह दिल रोता है, रोये सिसक सिसक के हवाएं, जग सूना लागे
छान से जो टूटे कोई सपना, (जग सूना सूना लागे - २ )
कोई रहे न जब अपना, (जग सूना सूना लागे - २ ) रे 
सूना लागे रे मोहे