महंगाई डायन

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गाना: महंगाई डायन
फिल्म: पीपली लाइव
गायक: रघुवीर यादव
गीत: स्वानंद किरकिरे
संगीत: राम संपत


(सखी सैयां तोह खूब ही कामात है 
महंगाई डायन खाए जात है ) - २ 
हर महिना उछले पेट्रोल, डिसेल का उछला है रोले 
शक्कर बाई के का बोल 
हर महिना उछले पेट्रोल, डिसेल का उछला है रोले 
शक्कर बाई के का बोल 
पूसा बासमती धान मरी जात है 
महंगाई डायन खाए जात है 
सखी सैयां तोह खूब ही कामात है 
महंगाई डायन खाए जात है 

सोया बान का का बेहाल, गर्मी से पिचके हैं गाल 
घिर गए पत्ते, पक्क गए बाल 
अरे सोया बीन का का बेहाल, गर्मी से पिचके हैं गाल 
घिर गए पत्ते, पक्क गए बाल 
और मक्का जी जी भी खाए गयी मात है 
(महंगाई डायन खाए जात है 
सखी सैयां तोह खूब ही कामात है ) - २ 
महंगाई डायन खाए जात है 

अरे कदू की हो गयी बर्मार 
ककड़ी ने करगे हाहाकार 
मटर भी तोह लगो परसाद 
अरे कदू की हो गयी बर्मार 
ककड़ी ने करगे हाहाकार 
मटर भी तोह लगो प्रसाद
और आगे का कहूँ कहे नहीं जात है 
( महंगाई डायन खाए जात है 
सखी सैयां तोह खूब ही कामात है ) - २ 
महंगाई डायन खाए जात है 

ए सैयां, ए सैयां रे .. मोरे सैयां रे खूब कावें, सैयां जी ..
अरे कम कम के मरर गए सैयां 
पहले तकड़े तकड़े थे अब दुबले पतले हो गए सैयां 
अरे कम कम के मरर गए सैयां 
मोती सैयां पतले सैयां 
अरे सैयां मरर गए हमारे किसी आये गए में 
( महंगाई डायन खाए जात है 
सखी सैयां तोह खूब ही कामात है ) - २ 
महंगाई डायन खाए जात है