कहा तक यह मनं को अँधेरे छलेंगे

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गाना: कहा तक यह मनं को अँधेरे छलेंगे
फिल्म: बातों बातों में
गायक: किशोर कुमार
गीत: योगेश गौड़
संगीत: राजेश रोशन


कहा तक येह मनं को अँधेरे छलेंगे 
उदासी भरे दिन कभी तोह ढालेंगे 

कभी सुख कभी दुःख यही जिंदगी है 
येह पतझड़ का मौसम घडी दो घडी है - (२)

नए फूल कल फिर डगर में खिलेंगे 
उदासी बहरे दिन कभी तोह ढालेंगे 

भले तेज कितना हवा का हो झोंका 
मगर अपने मनं में तू रख येह भरोसा - (२)

जो बिछड़े सफ़र में तुझे फिर मिलेंगे 
उदासी भरे दिन कभी तोह ढालेंगे 

कहे कोई कुछ भी मगर सच यही है 
लहर प्यार की जो कही उठ रही हैं - (२)

उसे एक दिन तोह किनारे मिलेंगे 
उदासी भरे दिन कभी तोह ढालेंगे 

कहा तक येह मन को अँधेरे छलेंगे 
उदासी भरे दिन कभी तोह ढालेंगे