समय का पहिया चलता है

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गाना: समय का पहिया चलता है
फिल्म: भूतनाथ
गायक: हरिहरन, सुखविंदर सिंह
गीत: जावेद अख्तर
संगीत: विशाल-शेखर


क्रोध के बोझ को मनं पे उठाये काहे चलता है प्राणी
क्षमा जो शत्रु को भी कर दे, वही मुक्त है, वही ज्ञानी

(समय का पहिया चलता है, दिन ढलता है, रात आती है
रात में जब एक छोटा सा, नन्हा सा दीपक जलाता है
उसकी जरसी ज्योत सही, पर दूर से उसको देख कोई बरसो का मुसाफिर
गिरते गिरते संभालता है) - (२)
समय का पहिया चलता है, दिन ढलता है, रात आती है

मैंने जाते जाते जाना कौन है अपना कौन पराया - (२)
बस तू ही मेरा अपना है, बस तुने प्यार निभाया
काम क्रोध और लोभ मैं धज?? कर जा सकता हूँ
तुझको चाहू भी तोह मैं कैसे भुला सकता हूँ
तेरा प्यार भी एक बंधन है, तू ही बता क्या मैं मुक्ति पा सकता हूँ
तू नहीं जानता तू मेरा अब है क्या
तुझको हूँ देखता तोह दिल कैसे पिघलता है
समय का पहिया चलता है, दिन ढलता है, रात आती है

दिन में सोया, रात आई तोह अब जागा सोया कब था - (२)
अब क्या सूरज ढूंढे पगले, डूब गया सूरज कब का
बरसो पहले जो थी इक नदी प्यार की बह गयी वोह नदी
हाथ अब तू क्या मलता है
समय का पहिया चलता है, दिन ढलता है, रात आती है
रात में जब एक छोटा सा, नन्हा सा दीपक जलाता है
उसकी जरसी ज्योत सही, पर दूर से उसको देख कोई बरसो का मुसाफिर
गिरते गिरते संभालता है
समय का पहिया चलता है, दिन ढलता है, रात आती है

आसमा में जगमग तारे, मेरी आँख में झिलमिल आंसू
कहा छुपा है कोई इशारा तोह दे दे तू