आ ज़रा

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गाना: आ ज़रा
फिल्म: मर्डर २
गायक: सुनिधि चौहान
गीत: कुमार
संगीत: संगीत हल्दीपुर, सिद्धार्थ हल्दीपुर


यह  रात रुक जाये बात थम जाये 
तेरी बाह़ो में ख्वाइशे जगी हैं 
प्यासे प्यासे लबो पे खुद  को जला दूं 
तेरी आहो में आगोश में आज मेरे समा जा 
जाने क्या होना है कल 
आ ज़रा 

करीब से जो पल मिले नसीब से 
आ जा ज़रा 
करीब से जो पल मिले 
नसीब से जिले …

ये  जहाँ सारा भूल कर, जिस्म के साए तले 
धीमी धीमी साँसे, चले रात भर पल दो पल 
हम हैं हमसफ़र, थे अभी दोनो यहाँ 
होगे सुबह जाने कहाँ, क्या खबर 
आ जा ज़रा 

खुद को मुझमे मिला जा, जाने क्या होना है कल 
आ ज़रा 
करीब से जो पल मिले नसीब से 
आ  जा ज़रा 
करीब से जो पल मिले नसीब से जिले …
ख्वाब हूँ मैं तोह मखमली, पलको में ले जा मुझे 
मैंने दिया मौका तुझे अजनबी, होश में आये ना अभी 
इक दूजे में ही  कहीं , खोयी रहे तेरी मेरी ज़िन्दगी 
खामोशिया धडकनो की सुना  जा 
जाने क्या होना है कल 
आ ज़रा 

करीब से जो पल मिले नसीब से 
आ जा  
जो पल मिले नसीब से जिले 
रात रुक जाये तेरी बाहो में 
आगोश में आज मेरे समा जा 
जाने क्या होना है कल 
आ ज़रा करीब से जो पल मिले 
नसीब से जिले