मुफ्त हुए बदनाम

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गाना: मुफ्त हुए बदनाम
फिल्म: बरात
गायक: मोहम्मद रफ़ी
गीत: मजरूह सुल्तानपुरी
संगीत: चित्रगुप्त


मुफ्त हुए बदनाम, किसी पे हाय दिल को लगाके
जीना हुवा इल्जाम, किसी पे हाय दिल को लगाके
मुफ्त हुए बदनाम........

(गए अरमान लेके, लूटे लूटे आते हैं
लोग जहा में कैसे दिलको लगते हैं) - (२)
दिलको लगते हैं, अपना बनाते है
हम तोह फिरे नादान - (२), किसी पे हाय दिल को लगाके 
मुफ्त हुए बदनाम........

(समझे थे साथ भेजा किसीका सुहाना घूम
उसी जो नजर को देखा, तनहा खड़े हैं हम) - (२)
तनहा खड़े हैं हम, दिल भी रहा है कम
रस्ते में हो गयी शाम - (२), किसी पे हाय दिल को लगाके
मुफ्त हुए बदनाम........