जला कोई मिटा कोई लुटा कोई रे

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गाना: जला कोई मिटा कोई लुटा कोई रे
फिल्म: बाज़
गायक: सुनिधि चौहान, कैलाश खेर
गीत:
संगीत:


अरे अरे अरे अरे अरे...........
(जला कोई, मिटा कोई, लुटा कोई रे
बचा कोई, फस कोई, उड़ा कोई रे) - (२)
यह तोह है प्यार, जीता कोई, हरा कोई
अरे अरे अरे ....... जला कोई, मिटा कोई, लुटा कोई रे
बचा कोई, फस कोई, उड़ा कोई रे

होश में आये होश गवाके, प्यार ना पाया खुद को लुटाके - (२)
चुप चुप के तड़प तड़प नैन रोये रे - (२)
हम दीवानों की रस्मे यही है
दर्द को छुपा के पूछते है, धुंडते है
अरे अरे अरे ....... जला कोई, मिटा कोई, लुटा कोई रे
बचा कोई, फस कोई, उड़ा कोई रे
दिल मचल मचल - (२)
दिल मचल मचल मचल मचल मचल जाये रे
ना लूटे कही जले युही बुझे, यही जले बुझे युही जाये रे
अरे अंदाज़ यह तेरा कातिल बड़ा तेरा
आ दिल यह हमारा निशाने पे ठहरा
इस जन का सौदा संग तेरे ही ठहरा
हर हुस्न से पहले इतना यूनी बहला
यह इश्क हमारा दीवाना ही तेरा, आ आ दिल मचल मचल

बाज़ की आँखे आँखों में बिजली, रंग ना उद्द जाये उड़ जारे पंछी
उड़ जा उड़ जा रे पंची उड़ उड़ उड़ जा
हे बाज़ की आँखे आँखों में बिजली, रंग ना उड़ जाये उड़ जारे पंछी
बच बच के संभल संभल निकल निकल रे -  (2)
प्यार में ऐसा भी अक्सर हुवा है
दिल के बदले में यह जान भी चल जाती है
अरे अरे अरे ....... जला कोई, मिटा कोई, लुटा कोई रे
बचा कोई, फस कोई, उड़ा कोई रे
जला कोई, मिटा कोई, लुटा कोई रे
बचा कोई, फस कोई, उड़ा कोई रे
यह तोह है प्यार, जीता कोई, हरा कोई