तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे

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गाना: तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे
फिल्म: बॉम्बे टॉकीज (१९७१)
गायक: मोहम्मद रफ़ी
गीत: हसरत जयपुरी
संगीत: शंकर-जयकिशन


(तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे - (२)
जर्रे जर्रे में मुझे प्यार नजर आता है
मेरी हर सांस में आती है तुम्हारी खुशबू
सारा आलम मुझे गुलजार नजर आता है) - (२)
तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे

ऐसा लगता है के हरयाले घने पदों में
तुम भी मौजूद ?? तो में छुपी बैठी हो
शाख हिलती है किसी नाजनी बाहों की तरह
और गुमान होता है तुम जैसे यहीं रहती हो
तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे
जर्रे जर्रे में मुझे प्यार नजर आता है
मेरी हर सांस में आती है तुम्हारी खुशबू
सारा आलम मुझे गुलजार नजर आता है
तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे
जब गुजरता है मेरे जिस्म को बादल छूकर
फिर कोई रेशमी आँचल मुझे याद आता है
मैं तोह हर चीज में पाता हूँ तुम्हारा चेहरा
इश्क क्या क्या मुझे परछाईया दिखलाता है
तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे
जर्रे जर्रे में मुझे प्यार नजर आता है
मेरी हर सांस में आती है तुम्हारी खुशबू
सारा आलम मुझे गुलजार नजर आता है
तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे
धुप और छाँव के मंजर भी अजब मंजर है
जब नजर मिलाती है सौ तीर चला देते हैं
और फूलों के छलकते से कटोरे हरदम
बीन पिए ही मुझे मस्ताना बना देते हैं
तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे
जर्रे जर्रे में मुझे प्यार नजर आता है
मेरी हर सांस में आती है तुम्हारी खुशबू
सारा आलम मुझे गुलजार नजर आता है
तुम मेरे प्यार की दुनिया बसी हो जबसे