चुपके से रात की चादर तले

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गाना: चुपके से रात की चादर तले
फिल्म: साथिया
गायक: साधना सरगम, मुर्तुजा कादिर
गीत: गुलज़ार
संगीत: ए. आर. रेहमान


दोस्तों से 
दोस्तों से झूटी मुती दूसरो का नाम ले के फिर मेरी बाते करना 
यारा रात से दिन करना 
लम्बी जुदाई तेरी बड़ा मुश्किल है आहो से दिल भरना 
यारा रात से दिन करना 
कब येह पुरी होगी, दूर येह दूरी होगी -२ रोज सफ़र करना 
यारा रात से दिन करना 

चुपके से चुपके से रात की चादर तले 
चाँद की भी आहात ना हो, बादल के पीछे चले 
जले कतार कतार, गले कतार कतार 
रात भी ना हिले आधी आधी -२ येह 
चुपके से चुपके से रात की चादर तले 

फरवरी की सर्दियों की धुप में, मुंदी मुंदी अंखियो से देखना 
हाथ की आड़ से 
निमी निमी ठण्ड और आग में, हौले हौले मारवा के राग में 
मीर की बात हो 
दिन भी ना दुबे, रात ना आये, शाम कभी ना ढले 
शाम ढले तोह सुबह ना आये, रात ही रात चले 
चुपके से चुपके से रात की चादर तले
चाँद की भी आहात ना हो, बादल के पीछे चले 

दोस्तों से झूटी मुती दूसरो का नाम ले के फिर मेरी बाते करना 
यारा रात से दिन करना 
लम्बी जुदाई तेरी बड़ा मुश्किल है आहो से दिल भरना 
यारा रात से दिन करना 
कब येह पुरी होगी, दूर येह दूरी होगी -२ रोज सफ़र करना 
यारा रात से दिन करना 

तुझ बिना पगली येह पुरवाई -२, आके मेरी चुनरी में भर गयी 
तू कभी ऐसे ही, गले लग जैसे येह पुरवाई 
आ गले लग जैसे येह पुरवाई, साथिया सुन तू 
कल जो मुझको नींद ना आये, पास बुला लेना 
गोदी में अपनी सर रख लेना, लोरी सुना देना 

चुपके से चुपके से रात की चादर टेल 
चाँद की भी आहात ना हो, बादल के पीछे चले 
जले कतार कतार, गले कतार कतार, रात भी ना हिले आधी आधी 
रात भी ना हिले आधी आधी येह 
चुपके से चुपके से रात की चादर टेल 
चाँद की भी आहट ना हो, बादल के पीछे चले