साथिया साथिया

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गाना: साथिया साथिया
फिल्म: साथिया
गायक: सोनू निगम
गीत: गुलज़ार
संगीत: ए. आर. रेहमान


साथिया .... साथिया 
मद्धम मद्धम तेरी येह गीली हंसी 
साथिया .... साथिया 
सुन के हमने सारी पी ली हंसी 

(हसती रहे तू हसती रहे, हया की लाली खिलती रहे 
जुल्फ के निचे गर्दन पे सुबहो शाम मिलाती रहे) - (२)
सोंधी सी हंसी तेरी, खिलती रहे मिलाती रहे 

पीली धुप पहन के तुम देखो बाग़ में मत जाना 
भंवरे तुमको सब छेड़ेंगे फूलो me मत जाना 
मद्धम मद्धम हंस दे फिर से, सोना सोना फिर से हंस दे 
ताजा गिरे पत्ते की तरह, सब्ज लवण पर लेते हुए 
आठ रंग हैं बहारो के, एक अदा में लपेटे हुए 
सावन भादों सारे तुझसे, मौसम मौसम हंसते रहना 
मद्धम मद्धम हसते रहना 
साथिया .... साथिया 
मद्धम मद्धम तेरी येह गीली हंसी 
साथिया .... साथिया 
सुन के हमने सारी पी ली हंसी 

कभी नीले आसमान पे चलो घुमाने चले हम 
कोई अब्र्र मिल गया तोह जमीं पे बरस ले हम 
तेरी बाली हिल गयी है 
कभी शब् चमक उठी है, कभी शाम खिल गयी है 

तेरे बालो की पनाह में इस सियाह रात गुजरे 
तेरी काली काली आँखे कोई उजली बात उतारे 
तेरी इक हंसी के बदले मेरी येह जमीं ले ले, मेरा आसमान ले ले 
साथिया .... साथिया 
मद्धम मद्धम तेरी येह गीली हंसी 
साथिया .... साथिया 
सुन के हमने सारी पी ली हंसी 

बर्फ गिरी हो वादी में, उन में लिपटी सिमटी हुयी 
बर्फ गिरी हो वादी में, और हंसी तेरी गूंजी 
उन में लिपटी सिमटी हुयी बात करे धुवा निकले 
गरम गरम उजला धुवा, नरम नरम उजाला धुवा